बैंकिंग लोकपाल स्कीम 2006
इस स्कीम की शुरुआत 1995 में किया गया था 2002 में इसमें संशोधन किया गया पुणे 2006 में संशोधन किया गया वर्तमान में यह बैंकिंग लोकपाल स्कीम 2006 के अंतर्गत कार्य कर रहा है बैंकिंग लोकपाल यह एक अपीली तंत्र जहां ग्राहकों के खिलाफअर्जी दे सकता है अगर बैंक में शिकायत की सुनवाई नहीं होती है तो पहले वह बैंकिंग अपीलीय तंत्र में शिकायत करेगा या 30 दिन में उसके शिकायत का निपटान नहीं होता है तो वह बैंकिंग लोकपाल में शिकायत कर सकता है जहां उसे 1000000 तक की अधिकतम क्षतिपूर्ति दी जाएगी। यह बैंकों को केवल जुर्माना लगाता है दंड नहीं देता ।पीड़ित कुछ की पूर्ति दिलाता है इसमें क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को इसमें शामिल नहीं किया जाता है। इसमें n.r.i. खाताधारक भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं ।2018 में इसकी में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया गया इसकी सीमा को लाख से बढ़ाकर 20 लाख कर दिया गया ।पीड़ित तृतीय पक्ष के लिए भी बैंक के खिलाफ शिकायत कर सकता है ।इसके लिए शिकायतकर्ता को कोई शुल्क नहीं अदा करना पड़ेगा। आप पीड़ित ऑनलाइन अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है ।2019 में इसमें एक और संशोधन हुआ जिसमें बैंकिंग लोकपाल स्कीम के अंतर्गत आफ एनबीएफसी को भी शामिल कर लिया गया है लेकिन वह एनबीएफसी जो जमा स्वीकार करते हैं कार्य करते हैं , अप्रैल 2019 में एक और संशोधन किया गया जिसमें इसमें सभी एनबीएफसी को इसके दायरे में लाया गया जिनकी पूंजी100 करोड़ से अधिक हो। जून 2019 में एक और संशोधन किया गया जिसमें तीन प्रकार के एनबीएफसी को इसके दायरे से बाहर किया गया । इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी, कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी, इंफ्रास्ट्रक्चर डेब्ट फंड एंड लिक्विडेशन कंपनी कंपनी
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