करतारपुर कॉरिडोर
करतारपुर सिखों के पवित्र स्थल के रूप में देखा जाता है करतारपुर में गुरुद्वारा नानक साहिब द्वारा अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष बिताए गए थे। भारतीय गुरदासपुर के से करतारपुर स्थित गुरुद्वारा साहिब की दूरी मात्र 6 किलोमीटर है 2019 से पूर्व गुरुद्वारा साहिब जाने के लिए पाकिस्तान से वीजा प्राप्त करके ही लाहौर होते हुए पहुंचा जा सकता था, 2019 में करतारपुर गुरुद्वारा साहब आरंभ कर दिया गया और अब बिना वीजा के पूर्व अनुमति प्राप्त करके भारतीय पहचान पत्र के साथ ( पासपोर्ट के साथ )करतारपुर दर्शन हेतु जा सकते हैं। सकारात्मक पक्ष -भारत और पाकिस्तान के मध्य लंबे समय से वार्ता बाधित है ऐसे समय में करते वक्त संपर्क बढ़ाकर वार्ता के लिए आधार का कार्य कर सकते हैं सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के संबंध में भी यह प्रयास सहायक हो सकता है । चुनौतियां- गुरुद्वारा साहिब समिति जो पाकिस्तान द्वारा गठित की गई है उसमें खालिस्तान आंदोलन कमांडर के रूप में नियुक्त किए गए हैं इस ने इस बात की संभावना को बढ़ा दिया है कि जम्मू- कश्मीर में नए परिवर्तन के पश्चात पाकिस्तान करतारपुर के माध्यम से खालिस्तानी आंदोलन को पुनः आरंभ करने के लिए प्रयास करें और भारत को अस्थिर करने के लिए नया मोर्चा खोले वर्ष 2021 में भारतीय खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान कॉरिडोर के आसपास आतंकी कैंपों को स्थापित कर रहा था खालिस्तान आंदोलन के बढ़ने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है । करतारपुर कॉरिडोर एक सकारात्मक पहल है और इस प्रकार की पहल का स्वागत किया जाना चाहिए,परंतु भारतीय खुफिया एजेंसियों को सतर्क रहना होगा और पाकिस्तान के किसी भी आतंकी प्रयास को क्रियान्वित करने को विफल करना होगा।
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